क्या आप जानते है LKG और UKG की फुल फॉर्म क्या होती है | All about LKG and UKG in Hindi


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किसी भी राष्ट्र के लिए एक अच्छी शिक्षा का होना उतना ही मायने रखता है, जितना की हमारे शरीर में बीमारी को लड़ने की क्षमता. उसी कड़ी में हमारे शिक्षा नीति को मजबूत बनाने के लिए एक ऐसी व्यवस्था बनाई गई है, जिनमे शुरुआती दौर में बच्चों की शिक्षा के लिए उनके घर से हटकर एक पद्धति विकसित की है. जिसे किंडरगार्टन कहा गया है, यह एक जर्मन शब्द है जिसका हिंदी में अर्थ “बच्चों का बगीचा” होता है. यानी साधारण शब्दों में कहें तो बच्चों को स्कूल के लिए prepare करना है. जब बच्चे अपने माँ बाप के पास रह कर आम व्यवहारिक सीखते है. उसके बाद की प्री स्कूल शिक्षा जिसे किंडरगार्टन या बालवाड़ी सिखाया जाता हैं, जो की 2 वर्षों के लिए होता है.

इसी को दो भागों में बटा हुआ, पहल LKG ( Lower Kindergarten ) व दूसरा UKG ( Upper Kindergarten ). इसी को हम साधारण भाषा में kg 1 और kg 2 कहते है. बच्चे इन दो सालों में आगे स्कूल जाने के लिए बच्चे अपने आप को तैयार कर लेते है और वे बड़ी आसानी से आगे की शिक्षा को ग्रहण करने में सक्षम हो जाते है.

आइए हम किंडरगार्टन, एलकेजी और यूकेजी को विस्तार से जानकारी लेते है ताकि हम प्री स्कॉलिन की अहिमियत को समझ सके.

LKG और UKG का मतलब क्या होता है?

LKG का मतलब

LKG का फूल फॉर्म Lower Kindergarten होता है. जिसका शाब्दिक अर्थ बच्चो के लिए बगीचा होता हैं. इसमें लगभग 3 से 4 साल के बच्चों को लिया जाता हैं. इस लेवल में बच्चो को समाज के प्रति जागरूक करना और शुरुआती शिक्षा के लिए तैयार करना सिखाया जाता है, ताकि बच्चे अपने माता पिता और अन्य परिवार के लोगो से हट कर समाज के गुण, रहन सहन, दोस्त बनाना, बड़ो से कैसे बाते किया जाना है इत्यादि चीजों को ध्यान रखा कर शिक्षा दी जाती है. बच्चों को उनके लिए पढ़ाई की सामग्री और उनको उपयोग करना भी सिखाया जाता हैं.

UKG का मतलब

UKG का फूल फॉर्म Upper Kindergarten होता हैं. जिसका शाब्दिक अर्थ बच्चों के लिए बगीचा होता है, ये LKG से थोड़ा एडवांस होता है. इसमें लगभग 5 से 6 साल के बच्चों को लिया जाता हैं. LKG में बच्चो को प्री स्कूल लेवल के लिए परिचित करना था, परंतु UKG में बच्चो को प्री लेवल स्कूल की वास्तविक ज्ञान देना होता है. इस लेवल में बच्चों को नंबर, भाषा, और अक्षरों का ज्ञान दिया जाता है. उनको सिखाया जाता है कि भाषा और शब्दों को कैसे बोलना है व कैसे लिखना इत्यादि इत्यादि बातों को ध्यान में रख कर शिक्षा दी जाती है.

Kindergarten का इतिहास

माना जाता है की सन् 1816 में सर्वप्रथम स्कॉटलैंड के एक दार्शनिक और अध्यापक, रॉबर्ट ओवेन ने इस पद्धति की शुरुआत एक स्कूल बना कर की. जिसमे हम ऊपर आपको बातें बताए उसी प्रकार की शिक्षा दी जाती थी. संयुक्त राज्य अमेरिका की शिक्षा बहुत मजबूत है, यह इस पद्धति की शुरुआत सन् 1860 में किया गया था, जो की वर्तमान में विकसित मानी जाती है. चीन की बात करे तो बच्चे 2 साल की उम्र में ही किंडरगार्टन जाना प्रारंभ कर देते है.

भारत में प्री-स्कूल या किंडरगार्टन

भारत की शिक्षा नीति में प्री-स्कूल को तीन अवस्थाओं में बटा गया है पहला प्लेग्रुप, दूसरा जूनियर किंडरगार्टन (Jr. KG) या लोवर किंडरगार्टन (LKG) और तीसरा सीनियर किंडरगार्टन (Sr. KG) या अपर किंडरगार्टन (UKG) होता है. प्रायः देखा जाता है एक प्लेग्रुप में डेढ़ से ढाई साल तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती हैं.  वही जूनियर किंडरगार्टन कक्षा में साढ़े तीन से साढ़े चार साल तक के बच्चों को और सीनियर किंडरगार्टन में साढ़े चार से साढ़े पांच साल तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती है. इस तरह बच्चे इस लेवल में सफल हो जाते है तब उनको प्राइमरी स्कूलों में भेज दिया जाता है. यह अवस्था होने से बच्चों को प्राइमरी स्कूल की लेवल की पाठ्यक्रम को समझने और पढ़ने में कठनाई नही होती हैं.

इस प्रकार यह शिक्षा अवस्था किसी राष्ट्र के लिए प्रयोगशाला की तरह कार्य करती है. आगे की शिक्षा उनको ग्रहण करने में ज्यादा कुछ दिकतो का सामना नही करना पड़ता है. जिसमे बच्चे भविष्य में राज्य के विकाश को समझे और जीवन के सारे संसाधन का उपभोग आवश्यकता के अनुसार करें.


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